Tuesday, April 19, 2011

मिल जाये मुझे निजधाम


लुट लुट जाऊं तुम चरणॊं में, कब दिन ऐसा आयेगा
मिट मिट जाऊं तुम चरणो में, तब गजब हो जायेगा

मैने तुमको पूजा हमेशा, क्योंकि तुम ज्ञानी विरागी हो
तुमने दिखाया मैं भी विरागी, अब कैसे ये राग रह पायेगा

जाननहार अस्तित्व मेरा, कभी समझ ना पाया था
कोई ना मेरा, कोई ना किसी का, यह राज ना जान पाया था

सब द्रव्य से निराला था मैं , ऐसा कभी ना माना था
खुद को रूपी, रागी मानकर, अनन्त काल बिताया था

अब तो नाम लिया है तेरा, वीरागी बनना मेरा निश्चित है
निश्चित है मुक्ति, निश्चित है मोक्ष, अनन्त सुख भी निश्चित है

धुन लगाऊं तेरे गुण की, तो कैसे ना मुक्ति पाऊंगा
समस्त पुदगल, समस्त राग, छोङकर निज पद जाऊंगा

राह दिखाई तुने ऐसी, जिसमें कोई कंकङ ना हो
सुख सागर में डुबकि लगाने, कि अब कोई कसर ना हो

मिटा दूंगा सारा अज्ञान मैं, अब नाम लिया मैने तेरा
राग को छोङू, द्वेष को तोङूं, निजधाम है बस मेरा

तात्विक जगत का नक्शा दिखाया, ऐसा तेरा ज्ञान महान
बलि बलि जाऊं तुझ चरणों पर, मिल जाये मुझे निजधाम

- सहजानंद वरनी जी 

गलतियाँ


एक चित्रकार ने सड़क के किनारे चित्र रख दिया और नीचे लिखा -
इसमें यदि कोई त्रुटि दिखे तो उसे बताऐं ।
शाम को चित्र पर इतनी बड़ी  list बन गयी कि चित्र ही नहीं दिख रहा था।
अगले दिन उसने फिर चित्र रखा और नीचे लिखा त्रुटियों को सुधार दें।
शाम तक 1 भी सुधार नहीं हुआ।
हम सबकी गलतियाँ तो बताते हैं, उन्हें सुधारना नहीं चाहते।

सोना


सोना जलता नहीं, अशुद्धि ही जलती है,
पर अशुद्धि के सम्पर्क में आकर सोने को भी तपना पड़ता है।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

Saturday, March 5, 2011

मैं एक हूँ बस एक जग में

मैं एक हूँ बस एक जग में , हें अनेकों अन्य जन
छोड़ निज,पर में रमे क्यों , क्यों डोलता तेरा ये मन





Parmatm Prakash Bharill

Saturday, October 23, 2010

धरम करत संसार सुख

धरम करत संसार सुख , धरम करत निर्वाण |
धरम पन्त साधे बिना , नर तिर्यंच सामान || 

Thursday, October 21, 2010

Uttam Kshama

खम्मामि सव्व जीवेषु सव्वे जीवा खमन्तु में, 
मित्ति में सव्व भूएसू वैरम् मज्झणम् केणवि |

KHAMEMI SAVVE JIVESHU I forgive all the living beings 
SAVVE JIVA KHAMANTU ME All the living beings forgive Me
MITTI ME SAVVA BHUTESU I am friendly towards all the living beings 
VERAM MAJJHAM NA KENVI And no one is my enemy 
MICHHAMI DUKKADDAM! And I ask for forgiveness from all!

Saturday, October 9, 2010